बरसों से, दोनों एक ही आवास में निवास करते हैं । दोनों का जन्म एक साथ हुआ और तब से अब तक एक पल भी ऐसा नहीं आया जब एक दूसरे से अलग हुए हों । दोनों जब अच्छे मूड में होते हैं तो गुनगुनाते हैं -- तू जहां जहां चलेगा मेरा साया साथ होगा- --- , साथ जिएंगे साथ मरेंगे यही है तमन्ना - - - , ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे , आदि आदि । दोनों के संबंध इतने प्रगाढ़ हैं कि क्या कहूं । दोनों में बहुत सी समानताएं हैं तो बहुत सी विषमता है लेकिन मजाल जो दोनों के संबंधों में कोई खटास आई हो । दोनों ने एक दूसरे से वादा तो नहीं किया ना ही कोई कसमें खाई किंतु फिर भी एक दूसरे के सुख में सुखी और दुख में दुखी होते हैं । दोनों के मिजाज में बहुत सी विशेषताएं हैं - एक की सोच कभी संकुचित तो विस्तृत भी मिजाज कभी गर्म तो कभी ठंडा , कभी दूसरे से सलाह ले कर काम करे तो कभी किसी की ना सुने , कभी खुद खाली रहे तो कभी चाहे भूसा ही भर ले ,कभी मिजाज धरातल पर तो कभी पहुंचे सातवें आसमान तक । दूसरा कभी संग कभी तंग ,कभी उदार तो कभी हर दिल अजीज ।कभी ठेस लगे तो उदास हो जाए और कभी खुशी मिले तो बल्लियों उछलने लगे ।कभी उथला तो कभी गहराई सात समुंदर की । कभी कोमल तो कभी कठोर , कभी साफ तो कभी काला । दोनों का कार्य अलग-अलग ,अपने अपने हिसाब से कार्य करते रहते हैं किंतु यदि कहीं अटक गए तो एक दूसरे से सलाह अवश्य करते हैं । हालांकि कभी-कभी सहमत नहीं होते और अपनी ही कर लेते हैं लेकिन फिर भी धैर्य रखते हैं , रिश्ते वही रहते हैं । लगाव इतना कि यदि एक की मृत्यु हो जाए तो तो दूसरा उसी क्षण आत्महत्या कर ले ।
ये हैंं शरीर के दो विभिन्न किंतु अभिन्न अंग दिमाग और दिल , दोनों ही अति महत्वपूर्ण । दोनों के अपने-अपने , अलग-अलग कार्य ,.कभी एक दूसरे से नहीं मिले कभी हाथ नहीं मिलाया ,हमेशा निश्चित दूरी बनाए रखी , लेकिन इतना प्यारा रिश्ता । इस रिश्ते को मैं क्या नाम दूं , समझ नहीं पा रहा हूं ।
इसी तरह एक परिवार के अभिन्न अंग -- माता-पिता भाई-बहन और बच्चे , एक अटूट रिश्ता जो अद्वितीय है । इस मीठे रिश्ते में कहां से आ जाती है, खटास । नए रिश्ते चाहे कितने ही जुड़ते जाएंं, पुराने रिश्तों की गहराई कम नहीं होनी चाहिये और यदि होती है तो यह परिवार के सदस्यों की कमजोरी है । जीवन पर्यंत रिश्तों की मिठास वैसी ही बनी रहनी चाहिए । रिश्ते जब टूटते हैं तो बड़ी ठेस पहुंचती है , दिल के कोने में एक रिक्तता बनी रहती है । कभी-कभी तो रिश्तों में खटास इतनी बढ़ जाती है कि यह जीवन पर्यंत चलती है और यह रिक्तता लिए हुए हैं व्यक्ति इस संसार से पलायन कर जाता है । उसके जाने के पश्चात , उसके परिवार के अन्य सदस्यों को चाहे आप भिन्न से अभिन्न बना लें , फिर से रिश्ता कायम कर लें , किंतु आप का वह अभिन्न अंग दिल में रिक्तता लिए ही इस दुनिया से चला गया , उसका क्या ? अच्छा है ,समय रहते ही , रिश्ते सुधार लिये जायें ।
ये हैंं शरीर के दो विभिन्न किंतु अभिन्न अंग दिमाग और दिल , दोनों ही अति महत्वपूर्ण । दोनों के अपने-अपने , अलग-अलग कार्य ,.कभी एक दूसरे से नहीं मिले कभी हाथ नहीं मिलाया ,हमेशा निश्चित दूरी बनाए रखी , लेकिन इतना प्यारा रिश्ता । इस रिश्ते को मैं क्या नाम दूं , समझ नहीं पा रहा हूं ।
इसी तरह एक परिवार के अभिन्न अंग -- माता-पिता भाई-बहन और बच्चे , एक अटूट रिश्ता जो अद्वितीय है । इस मीठे रिश्ते में कहां से आ जाती है, खटास । नए रिश्ते चाहे कितने ही जुड़ते जाएंं, पुराने रिश्तों की गहराई कम नहीं होनी चाहिये और यदि होती है तो यह परिवार के सदस्यों की कमजोरी है । जीवन पर्यंत रिश्तों की मिठास वैसी ही बनी रहनी चाहिए । रिश्ते जब टूटते हैं तो बड़ी ठेस पहुंचती है , दिल के कोने में एक रिक्तता बनी रहती है । कभी-कभी तो रिश्तों में खटास इतनी बढ़ जाती है कि यह जीवन पर्यंत चलती है और यह रिक्तता लिए हुए हैं व्यक्ति इस संसार से पलायन कर जाता है । उसके जाने के पश्चात , उसके परिवार के अन्य सदस्यों को चाहे आप भिन्न से अभिन्न बना लें , फिर से रिश्ता कायम कर लें , किंतु आप का वह अभिन्न अंग दिल में रिक्तता लिए ही इस दुनिया से चला गया , उसका क्या ? अच्छा है ,समय रहते ही , रिश्ते सुधार लिये जायें ।
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