देश भाव डूबे न कभी भी,
रहेंं रत सेवा में हर दम।
कटुता का संचार रहे ना हम में,
गूंजे दिल में वीणा की सरगम।
रहेंं रत सेवा में हर दम।
कटुता का संचार रहे ना हम में,
गूंजे दिल में वीणा की सरगम।
कभी-कभी जब भी छा जायें,
उमड़ घुमड़ कर संकट के बादल ,
हटें न पीछे ये बादल मिटा दें,
गूंजती रहे गंगा-यमुना की कल कल।
स्वतंत्र हैं हम पर फिर भी,
हैं परतंत्र क्यों अपने दिल के।
उजाला दिलों में अपने कर दें,
बन जायें हम राही मंजिल के।
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