त्योहार आते हैं ,चले जाते हैं
पर इनका महत्व है इतना ।
इंसान के सोए दायित्व को
दे जाते हैं ये एक नई चेतना।
मिला मुझे और ग्रहण किया
तुम्हारे स्नेह में भीगा
भ्राता और भगिनी के बीच
अटूट प्रेम को द्रढ़ बनाने और
चतुर्मुखी उन्नति की मनोकामना लिए
पवित्र धागा।
मेरे दायित्व को
मिली नई चेतना
मैंने जानी कच्चे धागे की मजबूती
भगिनी मैं भी करता हूं
हृदय की गहराइयों से
तुम्हारे प्रति अपना दायित्व
निभाने का वादा।
पर इनका महत्व है इतना ।
इंसान के सोए दायित्व को
दे जाते हैं ये एक नई चेतना।
मिला मुझे और ग्रहण किया
तुम्हारे स्नेह में भीगा
भ्राता और भगिनी के बीच
अटूट प्रेम को द्रढ़ बनाने और
चतुर्मुखी उन्नति की मनोकामना लिए
पवित्र धागा।
मेरे दायित्व को
मिली नई चेतना
मैंने जानी कच्चे धागे की मजबूती
भगिनी मैं भी करता हूं
हृदय की गहराइयों से
तुम्हारे प्रति अपना दायित्व
निभाने का वादा।
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