मैं इंसान बनना चाहता हूं
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-- तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है, बनना चाहता हूं तो बनना चाहता हूं । क्यों बनना चाहता हूं , इस बात को छोड़ो, मूल बात यह है कि बनना चाहता हूं । आप सोच रहे होंगे कि जैसे आप लोग इंसान हो वैसे ही मैं भी इंसान हूं लेकिन, मैं इस बात को नहीं मानता । बरसों पहले इस बात का बीज मेरे दिमाग में डाला गया था , यही कोई लगभग 45 साल पहले । एक नेकदिल कन्या ने मेरी बहिन को बोला कि तेरा भाई इंसान तो नहीं है । जब मेरी बहिन ने यह बात मुझे बताई तो मैं बड़ी सोच में पड़ गया । मैंने उसको पूछा कि फिर मैं क्या हूं ? तो उसने कहा कि मेरी सहेली् ने फिर आगे कहा था कि तेरा भाई भगवान भी नहीं है । यह लो , और लोचा आ गया । अब तो मैं बड़े पशोपेश में पड़ गया । ना मैं इंसान हूं ना मैं भगवान हूं तो क्या मैं शैतान हूं ? तब मेरी बहन ने मेरी शंका का समाधान किया और कहा कि नहीं भाई साहब ,आप शैतान तो कतई नहीं हो । अब तो मेरे दिमाग का दही जमना शुरू हुआ कि जब मै इंसान नहीं हूं, भगवान नहीं हूं , शैतान भी नहीं हूं तो आखिर हूं क्या ? मुझे लगा कि मैं सिर्फ चूंचूं का मुरब्बा हूं । अब यदि मैं लोगों को कहता हूं कि मैं चूंचूं का मुरब्बा हूं तो कोई इस बात को समझ नहीं पाएगा और इस नई प्रजाति के बारे में तरह तरह की शोध शुरु हो जाएगी । अंततःमैंने सोचा कि मुझे तो इंसान ही बनना चाहिए । इसके लिए बरसों से प्रयत्न किये जा रहा हूं , बहुत से साधु ,महात्माओं , बुद्धिजीवियों से संपर्क किया , बहुत से शब्दकोषों मेंं अपना सिर दे मारा लेकिन सही-सही और पूरी परिभाषा या जानकारी मुझे कहीं नहीं मिली । मैं बहुत परेशान हूं , भाई साहब ! मैं वास्तव में , सही से , अपने दिल से , आपको बताना चाहता हूं कि मैं इंसान बनना चाहता हूं , मैं बहुत समय से इंसान बनने के लिए फार्मूला ढूंढ रहा हूं । अब , आप लोग इंसान है या नहीं यह तो मैं नहीं जानता लेकिन फिर भी आप लोगों से मैं निवेदन करता हूं कि यदि आपके पास ऐसा कोई फार्मूला है तो कृपया मुझे जरूर बताएं , क्योंकि एक बार फिर आपको बता दूं कि , मैं इंसान बनना चाहता हूं ।
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-- तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है, बनना चाहता हूं तो बनना चाहता हूं । क्यों बनना चाहता हूं , इस बात को छोड़ो, मूल बात यह है कि बनना चाहता हूं । आप सोच रहे होंगे कि जैसे आप लोग इंसान हो वैसे ही मैं भी इंसान हूं लेकिन, मैं इस बात को नहीं मानता । बरसों पहले इस बात का बीज मेरे दिमाग में डाला गया था , यही कोई लगभग 45 साल पहले । एक नेकदिल कन्या ने मेरी बहिन को बोला कि तेरा भाई इंसान तो नहीं है । जब मेरी बहिन ने यह बात मुझे बताई तो मैं बड़ी सोच में पड़ गया । मैंने उसको पूछा कि फिर मैं क्या हूं ? तो उसने कहा कि मेरी सहेली् ने फिर आगे कहा था कि तेरा भाई भगवान भी नहीं है । यह लो , और लोचा आ गया । अब तो मैं बड़े पशोपेश में पड़ गया । ना मैं इंसान हूं ना मैं भगवान हूं तो क्या मैं शैतान हूं ? तब मेरी बहन ने मेरी शंका का समाधान किया और कहा कि नहीं भाई साहब ,आप शैतान तो कतई नहीं हो । अब तो मेरे दिमाग का दही जमना शुरू हुआ कि जब मै इंसान नहीं हूं, भगवान नहीं हूं , शैतान भी नहीं हूं तो आखिर हूं क्या ? मुझे लगा कि मैं सिर्फ चूंचूं का मुरब्बा हूं । अब यदि मैं लोगों को कहता हूं कि मैं चूंचूं का मुरब्बा हूं तो कोई इस बात को समझ नहीं पाएगा और इस नई प्रजाति के बारे में तरह तरह की शोध शुरु हो जाएगी । अंततःमैंने सोचा कि मुझे तो इंसान ही बनना चाहिए । इसके लिए बरसों से प्रयत्न किये जा रहा हूं , बहुत से साधु ,महात्माओं , बुद्धिजीवियों से संपर्क किया , बहुत से शब्दकोषों मेंं अपना सिर दे मारा लेकिन सही-सही और पूरी परिभाषा या जानकारी मुझे कहीं नहीं मिली । मैं बहुत परेशान हूं , भाई साहब ! मैं वास्तव में , सही से , अपने दिल से , आपको बताना चाहता हूं कि मैं इंसान बनना चाहता हूं , मैं बहुत समय से इंसान बनने के लिए फार्मूला ढूंढ रहा हूं । अब , आप लोग इंसान है या नहीं यह तो मैं नहीं जानता लेकिन फिर भी आप लोगों से मैं निवेदन करता हूं कि यदि आपके पास ऐसा कोई फार्मूला है तो कृपया मुझे जरूर बताएं , क्योंकि एक बार फिर आपको बता दूं कि , मैं इंसान बनना चाहता हूं ।
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