आ भी जा अब तो प्रिये कि सपनों के महल खंडहर बने हैं,
मेरे ही ख्वाब मेरे ही सपने खाने को ठोकर दर-दर बने हैं।
पाया तुझे तो मुझे सपना सुहाना मिला था,
नीरस से जीवन में जीने का बहाना मिला था,
पर अब तो सांसें भी रुकने लगी हैं,
खुशियों के मोती की माला टूटने लगी हैं।
अब तो नजर मेहरबांं कर कि दिल के घर से बेघर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये - - - -
मेरी इन सांसों में तेरी ही महक थी,
दिल की तरंगों में कैसी एक चहक थी,
कहां गई वह घड़ी मिलन की बनी थी जो,
सूख गई नदिया क्यों प्यार की बनी थी जो।
अब तो सुन पुकार मेरी कि दुख के समंदर की लहर बने हैं ,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
सूरज के गोले सा दिल दहक रहा है,
विरह वेदना से दिल तड़प रहा है,
कैसी थी तेरी वह होठों की मधुर मुस्कान,
भूल सकूंगा कैसे गाए थे हमने जो प्रणय गान ।
माफ कर मुझे कि ये गीत अब तो जहर बने हैं ,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
न जाने दिन गुजर जाता था कैसे ,
वर्ष भर भी एक पल लगता था जैसे,
तेरी ही राहों में अपने को ढाला था मैंने,
पाकर तुझे अपने पथ पर किया उजाला था मैंने।
देर न कर कि पल पल भी अब तो कहर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
सोचा था सपने सच बनेंगे हमारे,
चमकेंगे नभ में बनके.सितारे,
निराशा छोड़ आशा का दामन थाम रहा हूं,
स्वीकार करे यह सोच प्रणय निवेदन फिर कर रहा हूं।
अब न ठुकरा निवेदन कि मेरे भाव इस प्रणय गीत के स्वर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये कि सपनों के महल खंडहर बने हैं।
मेरे ही ख्वाब मेरे ही सपने खाने को ठोकर दर-दर बने हैं।
पाया तुझे तो मुझे सपना सुहाना मिला था,
नीरस से जीवन में जीने का बहाना मिला था,
पर अब तो सांसें भी रुकने लगी हैं,
खुशियों के मोती की माला टूटने लगी हैं।
अब तो नजर मेहरबांं कर कि दिल के घर से बेघर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये - - - -
मेरी इन सांसों में तेरी ही महक थी,
दिल की तरंगों में कैसी एक चहक थी,
कहां गई वह घड़ी मिलन की बनी थी जो,
सूख गई नदिया क्यों प्यार की बनी थी जो।
अब तो सुन पुकार मेरी कि दुख के समंदर की लहर बने हैं ,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
सूरज के गोले सा दिल दहक रहा है,
विरह वेदना से दिल तड़प रहा है,
कैसी थी तेरी वह होठों की मधुर मुस्कान,
भूल सकूंगा कैसे गाए थे हमने जो प्रणय गान ।
माफ कर मुझे कि ये गीत अब तो जहर बने हैं ,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
न जाने दिन गुजर जाता था कैसे ,
वर्ष भर भी एक पल लगता था जैसे,
तेरी ही राहों में अपने को ढाला था मैंने,
पाकर तुझे अपने पथ पर किया उजाला था मैंने।
देर न कर कि पल पल भी अब तो कहर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये- - - -
सोचा था सपने सच बनेंगे हमारे,
चमकेंगे नभ में बनके.सितारे,
निराशा छोड़ आशा का दामन थाम रहा हूं,
स्वीकार करे यह सोच प्रणय निवेदन फिर कर रहा हूं।
अब न ठुकरा निवेदन कि मेरे भाव इस प्रणय गीत के स्वर बने हैं,
आ भी जा अब तो प्रिये कि सपनों के महल खंडहर बने हैं।
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