प्रकाश की इन किरणों में
ये कण क्यों डोल रहे हैं ,
आते जाते भाव मेरे मन के
क्यों दिल के झूले में झूल रहे हैं ।
किरणों में ये जो कण हैंं
चमचम क्यों चमक जाते हैं ,
भाव गीतों के मेरे दिल में
आते आते क्यों बहक जाते हैं ।
किसने रोका पथ किरणों का
कौन राह में बना अड़चन है,
और कौन है जो छाया है मुझ पर
क्यों दिल में हुई तड़पन है।
ये कण क्यों डोल रहे हैं ,
आते जाते भाव मेरे मन के
क्यों दिल के झूले में झूल रहे हैं ।
किरणों में ये जो कण हैंं
चमचम क्यों चमक जाते हैं ,
भाव गीतों के मेरे दिल में
आते आते क्यों बहक जाते हैं ।
किसने रोका पथ किरणों का
कौन राह में बना अड़चन है,
और कौन है जो छाया है मुझ पर
क्यों दिल में हुई तड़पन है।
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