पूरा ना मिले , मिल जाए बस आधा,
हां यही है मेरी अभिलाषा ।
गले मिलो या ना मिलो पर,
देखने दिखाने को तो आजा।
इतनी भी रंजिश क्या ए मेरे यार,
खिड़की खुली है पर बंद है दरवाजा ।
खरा उतरे ना उतरे गम न कर,
मिलने का एक बार तो कर ले वादा ।
कुछ तो बोल ए मेरे नसीब ,
कम बोलेगा पर समझूंगा ज्यादा ।
पूरा न मिले,मिल जाये बस आधा ।
हां यही है मेरी अभिलाषा ।
गले मिलो या ना मिलो पर,
देखने दिखाने को तो आजा।
इतनी भी रंजिश क्या ए मेरे यार,
खिड़की खुली है पर बंद है दरवाजा ।
खरा उतरे ना उतरे गम न कर,
मिलने का एक बार तो कर ले वादा ।
कुछ तो बोल ए मेरे नसीब ,
कम बोलेगा पर समझूंगा ज्यादा ।
पूरा न मिले,मिल जाये बस आधा ।
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