सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

धरती कहे पुकार के

जन्म दात्री इस माटी का सम्मान करें,
सर्वप्रिय है जो देश हमें उसका गुणगान करें।
 आजाद हिंद के होंं सिपाही सेवा देश की कर जायें,
 मोह रहे न तन का प्राण न्योछावर कर जायें।
 गुलशन बन जायें हम भी देश में आती बहार के,
पूर्ण धरा पर हरियाली कर दें धरती कहे पुकार के।
 मातृभूमि के जन-जन को नूतन जीवन दान करें,
 पाठ पढ़ायें ऐसा उनको भारत पर अभिमान करें।
 हटेंं ना पीछे कभी भी हम काम निराला कर जायें,
 हो जायें चाहे शहीद नाम देश का अमर कर जायें।
  बन जायें वंशज हम डोली उठाते कहार के,
उठाएं मातृभूमि की डोली फिर धरती कहे पुकार के।
 सर्वत्र देश का नाम हो ऐसा हम अभियान करें,
  सर्वमुखी प्रतिभा फैले जग में ऐसा हम अरमान करें।
 आभा से हो जाए पूर्ण सेवा ऐसी करते जायें,
सुवासित हो उपवन यह खून से इसे सींचते जायें।
 माझी ना बन जायें कहीं हम नदियों की मझधार के,
 नय्या देश की पार करें हम धरती कहे पुकार के।
वीर शहीदों ने सींचा इसको हम इसकी रखवाली करें,
संपन्नता से हो जाए पूर्ण फिर रोज हम दिवाली करें।
 ना रहे भूख कहीं भी अन्न इतना उपजायें,
 आंख उठाये दुश्मन जो सीमा पर डट जायें ।
गीत गायें फिर हम खुशहाली की नौका विहार के,
भारत मां के लाल हैं हम धरती कहे पुकार के।

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