सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

याद जाती क्यों नहीं है-कविता

 याद जाती क्यों नहीं है  

फरियाद आती क्यों नहीं है।

राह निहारते मेरे इन चक्षुओं से,

अश्रुओं की बरसात होती क्यों नहीं है।


  दिन ढला और रात की ओर बढ़ा,

  समय का चक्र फिर दिन की ओर चला।

  मैंने तो अपने को ढाला है तुम्हारे ही सांचे में,

  फिर अब मुलाकात होती क्यों नहीं है। 


अब हम कितनी फ़रियाद करें तुमसे ,

आंसुओं का सैलाब सहा नहीं जाता हमसे।

तुम तो हमें याद करो या ना करो,

 पर मेरे दिल से तुम्हारी याद जाती क्यों नहीं है।  

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