कसम गीता की खाकर झूठी गवाही दे रहे
सत्य असत्य के सामने शर्मिंदा हो रहे।
कर लें कितनी हीअपने कथन में असत्य की भरत,
हल्का होगा असत्य ही जब खुलेगी हर एक परत।
असत्य कितना ही पर्वत पर चढ़कर इतराये,
सत्य तो सागर की गहराई से मोती चुनकर लाये।
सत्य वचन बोलकर हरिश्चंद्र बन जाये,
असत्य वचन बोलकर झूठा ही कहलाये।
मान सदा ही बढ़े जो सच बोलता जाये,
झूठा तो सदा ही अपमानित होता जाये।
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