शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

वेदना-कविता

 स्थितियां ऐसी हो जाती है कभी-कभी,

  दिल को नहीं भाती कोई भी खुशी।

  वेदना से त्रस्त हो जाता है दिल,

  हर आंख नजर आती है झुकी झुकी।

  कभी-कभी अपना ही कष्ट होता है, 

   जो अपनी आंखों में आंसू ला देता है। 

 हां कभी दूसरों का  भी कष्ट देखा नहीं जाता,

 और वेदना से दिल भर जाता है।

  कभी ख़ुशी कभी ग़म का चक्र चलता रहता है,

 इसी उहापोह में वक्त गुजरता जाता है।

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