जरा सी आहट होती है,
तो दिल सोचता है कि,
करूं तो क्या करूं।
जो भी सामने आता है,
उसका सामना करूं या
फिर उससे डरूं।
कभी-कभी तो अच्छा लगता है
आहट का ही इंतजार रहता है,
कहीं वही तो नहीं आ गया
जिसका इंतजार है।
कभी शुभ की आशा में,
दिल की कली खिलने लगती है,
लेकिन कभी अंदेशा भी होता है,
कहीं कुछ ऐसा तो नजर नहीं आएगा,
कि दिल धक से रह जाएगा।
कुछ भी हो आहट होती है,
और होती रहेगी।
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