न बातें निराधार बनाती है,
नाराजगी न दिल में बसाती है।
जो भी कहते हैं करती रहती है,
मकान को घर वही बनाती है।
न जाने इतनी ऊर्जा कहां से लाती है,
कभी कोई बहाना नहीं बनाती है।
कितना भी काम हो घर का
हंसी खुशी से निपटा देती है।
छोटों को प्यार बड़ों को सम्मान देती है,
बदले में इसके न कुछ लेती है।
यदि कुछ अधिक भी करने को कहा जाए,
तो अभी करती हूं यही कहती है।
कभी गम खाती और आंसू पीती है,
कभी भी ना आंखें नम बनाती है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें