मंगलवार, 1 नवंबर 2022

किताब चाय और अलाव --कविता

 जब जब भी मैं किताब पढ़ता हूं,

 साथ में चाय की प्याली मुझे बहुत भाती है।

 जब भी ऐसा होता है तब मैं किताब पढ़ता हूं, 

 और कभी किताब मुझे पढ़ाती हैं।


   लगातार जब मैं किताब पढ़ता हूं,

  तो बहुत जल्दी ऊब जाता हूं।

  उसी तरह लगातार चाय पीने से भी,

   पीता-पीता ऊब जाता हूं ।


 लेकिन जब दोनों का साथ मिल जाए,

   तो सोने में सुहागा हो जाता है।

   पढ़ने में मन भी लगता है,

 और याद भी होता जाता है। 


  कभी-कभी सर्दी के समय,

  अलाव का इंतजाम हो जाए।

 इन तीनों का साथ जब भी हो जाए,  

 तो समझो पढ़ने का मजा कैसा हो जाए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें