शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

रात भर नींद न आई -- हास्य कविता

 पेट मेरा कितना भी खाली क्यों ना हो,

  खाने को कुछ मिले या ना मिले,

 पर सच बताऊं मेरे यारों,

 चैन तो तभी आए जब नैन मिले।


 नैन मिले नैन मिले नैन मिले यही सोचता रहा,

 जो मुझ में समाये उसे खोजता रहा।

  एक नटखट सी मुझे राह में मिली,

  पर चल हट कह कर चल निकली।


 जब से नैन मिले मेरी चमेली से, 

 नैन-नक्श कमतर थे उसकी सहेली से। 

 फिर भी मैंने उसके दिल से दिल मिला लिया,

 मन ही मन उसे अपना मान लिया।

 

वह भी इसी खोज में थी कि उसे कोई मिले,

 जिसके मीठी मीठी बातों से उसका दिल खिले।

 मिले जो हम दोनों नजरें झुकाए थे,

  दिल के जज्बात हमने छुपाए थे।


जब नजरों से नजरें मिल गईं,

तो दोनों एक साथ खूब खिलखिलाये थे,

अपने दिल के उपवन में,

 तरह तरह के फूल खिलाये थे ।


 पर जब से देखा उसके बाप को,

 बाप रे बाप क्या बताएं आपको।

 डील-डोल और शक्ल से राक्षस लगता था,

 समझ लो कि प्यार का भक्षक लगता था।

 

 हम दोनों ने  जी भर खूब की दिल्लगी,

 मैं उसे और  वह मुझे चिट्ठी देने लगी।

  लेकिन आज रात भर मुझे नींद ना लगी ,

 जबसे मेरी चिट्ठी उसके बाप के हाथ लगी।

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