जमीं खो चुका हूं आसमां की तलाश में हूं।
इस बार हार गया तो क्या फिर जीत की आस में हूं।।
मन में रखता हूं विश्वास और लड़ने का माद्दा।
इसीलिए समझता हूं कि मैं विजय के आस-पास हूं।।
फिसलता हूं कभी-कभी राहों में।
यह फिसलन मुझे कभी रोक नहीं पाएगी।
गिरकर उठने पर मिलती है नई ताकत।
अब नहीं हार में फिर जीत की प्यास में हूं।।
अनेक बार हार कर भी अब जीत की प्रयास में हूं।
जमीं खो चुका हूं आसमां की तलाश में हूं।।
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