सोमवार, 7 नवंबर 2022

सुनो मनमीत/मधुमीत कविता (संशोधित)

 जीवन की दौड़,जैसे घुड़दौड़।

कोई रहा जोड़ ,कोई रहा तोड़।।

कोई है पुण्यात्मा,कोई पापी।

एक अकड़ रहा,दूजा मांगे माफी।।


गये हम जीत,सुनो मधुमीत।

मैं हूं गीत, तुम संगीत।।

लगाकर ध्यान, सुने सब गान।

 नहीं अज्ञान , सभी संज्ञान।।


पहले तोल , फिर बोल ।

जो हो सही,वही हो कही।।

बजाकर ढोल , न खोल पोल।

मीठे बोल , मिश्री घोल ।।


 किसी पहर , होगी सहर ।

तुम्हारी नजर , करेगी असर।।

  रख ले धैर्य,न हो अधीर।

 तुम्हारी जिंदगी,बनेगी नजीर।।

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