मंगलवार, 29 नवंबर 2022

टेलीविजन का प्रभाव - कहानी


#विधा : कहानी

सतीश गुप्ता पोरवाल, जयपुर। 


अच्छा भला परिवार था, सब अच्छे से समय गुजार रहे थे। लेकिन मोहित के घर टी वी आने के बाद माहौल बदलता जा रहा था। पत्नी कामिनी को सीरियल देखने का शौक था। लगभग सभी सीरियल में स्त्रियां साजिश करती हुई नजर आती हैं ,और ऐसी ही भावना कामिनी के अंदर घर करने लगी और परिवार का माहौल बिगड़ने लगा। मोहित अक्सर समाचार सुना करता था । सब जानते हैं कि समाचारों को बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है। अतः सरकार के प्रति उसके मन में दुर्भावना आने लगी। जब भी दोस्तों के साथ बैठता, सरकार की कमियां बताता रहता जिससे उसके दोस्त उससे दूर होते चले गए। बच्चे कौन से कम थे , जब-तब कार्टून फिल्में देखते और उनके जैसे ही संवाद करने लगते। टेलीविजन के बहुत पास बैठते । समय के साथ धीरे-धीरे उनकी नेत्र ज्योति कम होने लगी और इतनी कम उम्र में ही उनको चश्मे की आवश्यकता पड़ गई।

  घर का माहौल जिस तरह से बिगड़ता हुआ नजर आ रहा था मोहित का क्रोध टेलीविजन पर बढ़ता ही जा रहा था । वह समझ गया था कि टेलीविजन से निरर्थक सामग्री परोसी जा रही है और यही कारण है कि घर का माहौल कुछ से कुछ हो गया है। एक दिन उसे लगा कि अति हो चुकी है तो उसने टेलीविजन उठाया और जमीन पर दे मारा और घर पर सब को ताकीद कर दिया कि जब तक सब कुछ पहले जैसा नहीं हो जाता वह दोबारा टेलीविजन नहीं लेगा और लेगा तो सब पर कुछ अंकुश तो लगेगा ही।

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