मैं जिंदा हूं तब तक आसमां दूर है मुझसे,
जिंदगी को बहुत गिला है मुझसे।
एक दिन मैं भी आसमां में समा जाऊंगा,
इस दुनिया से हमेशा के लिए चला जाऊंगा।
जरा ठहरो मुझे सोच तो लेने दो,
इस दुनिया में क्यों आया समझ लेने दो।
सच तो यह है मेरे दोस्तों मैं स्वयं नहीं आया
मुझे अपनों के द्वारा लाया गया।
अब जब आ ही गया हूं इस दुनिया में,
मेरे अपनों की इस सुंदर बगिया में।
तो समझ लेने दो दुनिया क्या है ।
वो दर्द-ए-ग़म बयां क्या है।
जिस दिन यह रूह रूठ कर चली जाएगी,
उस दिन यह जमीं यह कायनात मेरी हो जाएगी।
उस दिन कुछ निशाँ छूटेंगे जरूर मुझसे,
मेँ जिंदा हूं तब तक आसमां दूर है मुझसे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें