बुधवार, 23 नवंबर 2022

काश!जिंदगी--कविता

 

काश!जिंदगी

#दिनांक:23/11/2022


 काश!जिंदगी को मैं जी पाता,

जितना चाहा था खुशियां पा जाता।

 अंजली भर खुशियों का मैं क्या करूंगा,

 दामन में न समाए इतनी देता मेरे दाता।


 काश ! मेरी मंजिल का मुझे पता होता,

  तो अब तक वहां पहुंच गया होता।

 किस राह पर चलूं यह भी मालूम नहीं,

  मालूम होता तो यही नहीं खड़ा होता।


   ऐ मेरी जिंदगी मुझे कुछ तो बता,

 क्या मुझसे हो गई है कोई तो खता।

कोशिश बहुत की पर समझ न आया,

  अब तू ही मुझे समझा यदि है पता।


 काश! जिंदगी मेरी जिंदगी हो पाती,

 मेरे बिखरे ख्वाबों को करीने से सजाती।

 खुशी से मैं जिंदगी को अपना बनाता,

  मेरे साथ साथ जिंदगी भी मुस्कुराती।


स्वरचित --

सतीश गुप्ता पोरवाल

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