घनघोर सी बरसती बारिश की बूंदों ने,
आज यह कैसा कहर ढाया है।
बाट जोहती मेरी इन आंखों को,
वह अभी तक नजर नहीं आया है।
बादलों के जमघट ने शोर मचाया है,
सूरज ने घबराकर अपना मुख छुपाया है।
आज उससे शायद मिलन ना हो पाए,
यही सोचकर दिल घबराया है।
ऐ घटाओं यदि वह राह में कहीं पर है ,
तो जमकर बरसो बारिश रुक ना पाए।
वह जहां पर हो वहीं पर रहे ,
वापस वहां से से जा ना पाए।
मैं छाता लेकर जाऊंगी उनसे मिलने,
उधर मौसम मेघ मल्हार गाएगा।
इधर छाते के नीचे मेरा दिल,
अपना प्यार पा जाएगा।
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