टेढ़ी मेढी पगडंडियों से गुजरती जिंदगी,
नाना प्रकार के सबक सिखाती जिंदगी।
कोई सीधे-सीधे सफर में चला जा रहा है,
कोई टेढ़े मेढ़े रास्तों से समेट रहा है जिंदगी।
जब दुनिया में आ गए तो जीना तो है,
अमृत या विष जो भी हो पीना तो है।
समझने की कितनी भी कोशिश कर लें,
पर समझ न आए यह जिंदगी।
ठहरे भवसागर में नाव जैसी नजर आती है,
सीधे-सीधे चलती जाती है ज़िंदगी।
कभी-कभी बिना पतवार के डोलती,
भंवर में फंसती नजर आती है जिंदगी।
नहीं समझ पाते आखिर क्या है यह जिंदगी,
किसी को तो लगता है एक पहेली है।
समझ बूझ कर यदि समझ लिया तो,
सच कहता हूं यह एक सहेली है।
कभी धूप कभी छांव नजर आती है,
कभी श्वेत कभी स्याह नजर आती है जिंदगी,
कोई नहीं जानता जिंदगी में,
क्या क्या रंग दिखाती है जिंदगी।
किसी को स्याह-रात काली घटा नजर आती है जिंदगी,
किसी को रंगीन खूबसूरत छटा नजर आती है जिंदगी।
अब जो भी हो जैसे भी हो कुछ भी हो,
मुझे ही नहीं सभी को जीनी है यह जिंदगी।
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