मन रे तू काहे न धीर धरे ।
ह्रदय तुम्हारा निर्मल जल सा,
दुनिया निर्मोही दिल में पीर भरे।
मन रे तू काहे न धीर धरे।
मन तेरा कितना है दया भरा,
दुनिया घाव गंभीर करे।
मन रे तू काहे न धीर धरे।
जग में तू धैर्यवान कहलाए,
दुनिया तुझे अधीर करे।
मन रे तू काहे न धीर धरे।
तू पर घावों पर मरहम लगाए,
दुनिया घाव गंभीर करे।
मन रे तू काहे न धीर धरे।
तेरी गरीबी का कोई उपहास उड़ाए,
पर तू दुनिया को अमीर करे।
मन रे तू काहे न धीर धरे।
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