मौन है सुखी जीवन का आधार,
जग के कोलाहल से वंचित हो,
तपस्या जब की जाती है,
तो शांति का मिलता है उपहार।
हमारी तो है बस यही कामना,
जीवन गुजरे शांति से सबका ।
यदि हो जाती है बहस कभी,
तो समझो मौन एक साधना।
सभी की प्रकृति को एक जैसा नहीं नापना,
किसी का स्वभाव प्रश्न किसी का जवाब देने का,
यदि प्रश्न है सही तो सही जवाब के लिए,
नहीं पड़ेगा किसी का मुंह ताकना।
निडर होकर करो सभी का सामना,
स्वयं हावी होने का ना करें प्रयास।
फिर भी यदि कोई आक्रामक हो,
तो समझो मौन एक साधना।
सतीश गुप्ता पोरवाल, जयपुर।
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