मंगलवार, 29 नवंबर 2022

बंद आंख - बड़ा धोखा -- लघु कथा

 रोशन लाल जी मोहल्ले के बड़े आदमी थे । प्रकृति उनकी कुछ ऐसी थी कि जो उन्होंने सोच लिया और कह दिया वही सही है। मोहल्ले के निवासी भी उनकी बड़ी इज्जत करते थे और उनकी बात को आंख मूंद कर मानते थे।

  उन दिनों शहर में एक कॉलोनी में भूखंड बेचे जा रहे थे । रोशन लाल जी ने कॉलोनाइजर से तय किया कि वे अपने मोहल्ले वालों को बहुत सारे भूखंड बिकवा देंगे। कॉलोनाइजर ने उन्हें बदले में अच्छी राशि के भुगतान का वादा किया । जब मोहल्ले के ही एक समझदार निवासी ने तह में जाकर मालूम किया तो मालूम हुआ कि यह जमीन तो सरकार अपने अधीन लेने वाली है। उन्होंने अपने मोहल्ले के निवासियों को बहुत समझाया लेकिन कोई उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुआ, उन सबको तो रोशन लाल जी पर पूरा भरोसा था। रोशन लाल जी की नजर उन्हें मिलने वाले धन पर थी , उनकी आंखों पर तो इस धन का चश्मा चढ़ा हुआ था। तो उन्होंने इस बात  पर कुछ ध्यान नहीं दिया। फल स्वरुप मोहल्ले वालों ने बहुत सारे भूखंड खरीद लिये।

 अगले वर्ष सरकार ने वह जमीन अपने अधीन कर ली और उसका मुआवजा किसान को दे दिया। किसान बड़ा धूर्त और स्वार्थी था ।उसने सारा धन अपने पास ही रख लिया और किसी को कुछ नहीं दिया। मोहल्ले के सारे निवासी ठगे जा चुके थे।

  कहते हैं ना किसी के ऊपर आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए, वरना पछताना पड़ सकता है, और हुआ भी यही।

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