सोमवार, 28 नवंबर 2022

नया कदम विश्वास के -- कविता

 राह में कांटे बहुत बिछाती है दुनिया,

  इन कांटो से बच कर तू आगे बढ़ना।

  लहू-लुहान न हो जाए कहीं पैर तेरे,

 बहुत सोच समझकर राह पर चलना।


 बाधाएं तो राह में आती ही हैं,

 इन बाधाओं से कभी न डरना।

 कभी जब हौसला होने लगे पस्त,

  तो अपने अंतर्मन की आवाज को सुनना। 


राहें तो अनेक हैं मंजिल पर पहुंचने को, 

पर सोच समझकर ही सही राह  चुनना। 

 मंजिल तो अवश्य ही मिल जाएगी तुझको,

 नये कदम विश्वास के रखकर तू आगे बढ़ना।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें