सोमवार, 28 नवंबर 2022

चूडियां

 हर स्त्री की चाहत होती है यही,

 कि जिंदगी भर वह सुहागन ही रहे। 

 काल न आ जाए उसके जीवनसाथी पर कभी,

 जब भी मरे सुहागन ही मरे।


मांग में भर लेती है अपने सिंदूर,

 सजाती है भाल पर बिंदिया।

 हथेलियों पर लगाती है मेहंदी,

 और कलाई में पहनती है चूड़ियां।


 रंग बिरंगी चूड़ियां चमकती हैं कलाई  में,

 स्त्री का चेहरा खिल खिल जाता है। 

 सुहागन होने का उसे होता है गर्व,

  सारी दुनिया का सुख जैसे उसे मिल जाता है।

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