शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

मुस्कुराना सिखाया है -- कविता

 पथराई आंखों में ख्वाब खोजते हैं,

 अश्रुपूरित आंखों के अश्रु  पोंछते हैं।

 हम कितने भी गाफिल रहे जमाने में,

 हर पल तुम्हारे बारे में ही सोचते हैं।


 ना सोचो कि ख्वाब हमारे अधूरे रहेंगे,

  सपने हमारे कभी ना पूरे होंगे।

  उजाले ही भर देंगे हर कहीं ,

  आंखों के सामने न घने अंधेरे होंगे।


हमने अपने सपनों में तुम्हें ही समाया है,

हमारे दिल में जब भी देखा तुम्हें ही पाया है।

 तुम कितने भी संगदिल हो ए सनम,

 हमने तो पत्थरों को भी मुस्कुराना सिखाया है।

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