गुरुवार, 10 नवंबर 2022

अपनी अपनी सोच -- कविता

 इंसान जब नजरें उठाकर ऊपर देखता है,

 किसी को कौवा,कबूतर या कोयल दिखती है।

 किसी की नजर बादलों में अटक जाती है,

 और किसी की आसमान तक पहुंचती है।


 किसी गिलास में आधी ऊंचाई तक पानी हो,

 किसी को आधा भरा किसी को खाली दिखता है।

  गुणवत्ता वाला माल धरा ही रहता है, 

  घटिया हाथों हाथ बिक जाता है।


  किसी के ख्याल उम्दा तो किसी के  में खोट है,

किसी को घर में किसी को बाहर का शौक है।

 जीवन जीने का नुस्खा ही सही खोज है, 

 सुन ले भैया अपनी-अपनी सोच है।


 सुन लो भैया अपनी-अपनी सोच है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें