यूं तो कमल जेंटलमैन दिखाई देता था, पढ़ा लिखा था, नौकरी भी अच्छी थी लेकिन उसका लालन-पालन अच्छे परिवेश में नहीं हुआ था। अतः संस्कार भी उसी प्रकार के मिले थे।
उसका बात करने का लहजा किसी को पसंद नहीं आता था।ऑफिस में भी अपने मातहत से "क्यों रे क्या कर रहा था" इस लहजे में बात करता था। अपनी पत्नी को "तुम्हारे अंदर दिमाग भी है कि नहीं , मैंने तुमसे कहा था कि ऐसे करना है और तुमने कैसे कर दिया, सारा गुड़ गोबर करके रख दिया, थोड़ा दिमाग का उपयोग किया करो"। बच्चों को भी इस कदर डांट लगाता था "खबरदार जो फिर से ऐसा किया , थप्पड़ मार-मार कर गाल लाल कर दूंगा"। उसके इस तरह से बात करने के सलीके से सभी परेशान थे,और यह तथ्य सही है कि परेशान व्यक्ति को वह सम्मान नहीं मिल सकता जो वह चाहता है।सभी कमल से कन्नी काटते थे ।
एक दिन मोहल्ले में एक आयोजन था।वहां पर कमल पहुंचा लेकिन किसी ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया, सभी ने उसको नजरअंदाज किया। कमल का मित्र रवि भी वहां मौजूद था। रवि उसके पास आया और उसको लेकर अन्य लोगों की तरफ गया।सबने रवि से तो बात की लेकिन कमल की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया , सबने उसे नजरअंदाज किया। रवि इस बात को भांप गया और कमल से कहा कि तुम्हें कुछ अजीब नहीं लग रहा,कोई भी तुमसे बात नहीं कर रहा है। तो कमल ने कहा कि हां मैं भी देख रहा हूं। मैं चाहता हूं कि लोग मुझसे बात करें लेकिन हर कोई मुझसे दूर होता जा रहा है।तब रवि ने उसको समझाया कि तुम नाम के ही नहीं वैसे भी कमल हो लेकिन तुम कीचड़ में फंसे हुए हो,इससे बाहर निकलोगे तो लोग तुम्हें पसंद करेंगे। जब कमल ने पूछा कि वह कैसे ? तो रवि ने समझाया कि तुम्हारे बात करने का सलीका बहुत गलत है। तुम यह सोचो कि इसी तरह सामने वाला तुमसे बात करेगा तो तुम्हें कैसा लगेगा। यदि तुम यह समझ लोगे तो तुम्हारे व्यवहार में परिवर्तन आ जाएगा।तुम सब से सम्मान से और इस तरह से बात करोगे कि सामने वाले को ठेस ना लगे तो तुम्हें भी सम्मान प्राप्त होगा और कोई भी नजरअंदाज नहीं करेगा।
यह बात याद रखो कमल कि "लफ्जों के बरतने का सलीका जरूरी है।"
कमल को यह बात समझ में आ गई, और रवि को उसमें परिवर्तन के संकेत नजर आने लगे ।
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