सोमवार, 14 नवंबर 2022

देखो बिना टिकट का खेल-बाल कविता

 देखो बिना टिकट का खेल। 

 आओ बच्चों चलें चौपाटी पर 

वहां खाएंगे भेल।

भांति भांति के लोग यहां पर 

 देखो बिना टिकट का खेल ।


 मम्मी ने भेजा मुझको घी लेने को,

 घर घर आकर खोला पैकेट तो,

 जमा मिला था तेल ।

 देखो बिना टिकट का खेल।


 अदालत में देखा एक अजूबा,

  झूठा था जो वह बच निकला,

 सच्चे को हो गई जेल।

 देखो बिना टिकट का खेल।


 अच्छा हुआ पटरी से दूर खड़े थे,

  अपनी ही धुन में मगन खड़े थे,

 धड़धड़ाता निकला फ्रंटियर मेल,

 देखो बिना टिकट का खेल।


जब हो जाए झगड़ा दो में,

 कोई वकील तो अलग कराए,

 और कोई कराए मेल।

  देखो बिना टिकट का खेल।

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