मानव मानव के मध्य संबंधों में,
मधुरता होती कुछ कम कुछ ज्यादा।
नमन है उन नर-नारी को,
जो समझे रिश्तो की मर्यादा।
स्वार्थ लोलुपता भरी हुई है,
कलुषित मानसिकता से हैं सरोबार।
नजर आ जाता है सहज ही,
उनका स्वार्थ भरा व्यवहार।
मानव में यदि मानवता नहीं होगी,
तो समझो मानव में पशुता होगी।
ऐसी पशुतावादी मानसिकता से,
कैसे रिश्तो की मर्यादा होगी ।
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