मंगलवार, 15 नवंबर 2022

रिश्तों की मर्यादा-- कविता

 मानव मानव के मध्य संबंधों में,

  मधुरता होती कुछ कम कुछ ज्यादा।

 नमन है उन नर-नारी को,

 जो समझे रिश्तो की मर्यादा।


 स्वार्थ लोलुपता भरी हुई है,

 कलुषित मानसिकता से हैं सरोबार।

 नजर आ जाता है सहज ही, 

 उनका स्वार्थ भरा व्यवहार।


  मानव में यदि मानवता नहीं होगी,

  तो समझो मानव में पशुता होगी।

  ऐसी पशुतावादी मानसिकता से,

  कैसे रिश्तो की मर्यादा होगी ।

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