रविवार, 27 नवंबर 2022

इसका मायका-उसका मायका

 * इसका मायका-उसका मायका*

   एक मध्यमवर्गीय परिवार में दो बहूएं थीं।बड़ी बहू एक अच्छे धनी परिवार से थी जबकि छोटी बहू एक साधारण से गरीब परिवार से। परिवार में सभी लोग एक दूसरे से अच्छा व्यवहार करते थे। जैसा कि होता है आज भी  कुछ परिवारों में यह रिवाज है कि  कुछ  त्यौहारों पर उनके मायके से कुछ ना कुछ- मिठाईयां/कपड़े के रूप में- आते हैं।ऐसे ही एक त्यौहार पर छोटी बहू को मालूम हुआ कि बड़ी बहू के मायके से 40 किलो लड्डू आ रहे हैं , तो छोटी बहू ने उत्सुकता वश अपने पिताजी को फोन किया और पूछा कि वे क्या भेज रहे हैं? उसके पिताजी ने कहा कि मैं भी लड्डू ही भेज देता हूं। त्यौहार के दिन छोटी बहू के मायके से सिर्फ 5 किलो ही लड्डू आए। छोटी बहू ने देखा तो उसे बहुत गुस्सा आया उसने पिताजी को फोन करके बोला कि आपने यह क्या किया मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दिया, मेरी जेठानी की तो वाह-वाह होगी और मेरी बुराई , मैं आपसे बहुत नाराज हूं, यह कहकर उसने फोन बंद कर दिया। त्यौहार का दिन आया तो छोटी बहू ने देखा कि सासूजी अपने रिश्तेदारों को दो बराबर के डिब्बे देती जा रही है यह कहते हुए कि एक बड़ी बहू और एक छोटी बहू के यहां से। छोटी बहू को बड़ा आश्चर्य हुआ कि यह बराबर बराबर के डिब्बे कैसे दिए जा रहे हैं? उसने सासूजी को पूछा कि मेरे पिताजी ने तो सिर्फ 5 किलो ही लड्डू भेजे और इस बात पर मैं पिताजी से बहुत नाराज भी हुई। आप  बराबर- बराबर कैसे दिये जा रही हो? तो सासु जी ने कहा कि तुम्हारे मायके की इज्जत हमारी इज्जत है।  मैंने  उन लड्डुओं  में और लड्डू मिला दिए और बराबर से सब कुछ दे रही हूं। बात सीधी है पर तूने समझी नहीं। जिसकी जितनी हैसियत हो, उसे उतना ही करना चाहिए। मैंने यह बात समझी और उसका उपाय करके समाधान निकाल लिया। छोटी बहू को बहुत पश्चाताप हुआ और उसने अपने पिताजी को फोन करके माफी मांगी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें