मंगलवार, 29 नवंबर 2022

मां की महत्ता -- कविता


#विषय: माँ 

 स्वरचित --

 सतीश गुप्ता पोरवाल , जयपुर।


ममता मयी माँ की महान महत्ता,

 दिल में दया और दर्द की गहनता।

  जान लो जज्बात जन्म जननी के,

  मेरा मन माँ के मन में महकता।


 बताऊं क्या बड़ी बात बेबसी की,

 रात रात भर रोती जो जन्म पर हंसी थी।

  भूल गया बेटा बड़ा बनकर,

 परायो पर प्यार पर माँ के लिये कंजूसी थी।


 मैंने अनजाने में मुट्ठी में माँ की उंगली मांगी,

अनजाने में ही अपनी अंजलि में उंगली थामी।

मेरे लिए इस दुनियां में कोई नहीं ,

  माँ ही मेरा आसमां माँ ही मेरी जमीं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें