रविवार, 13 नवंबर 2022

जाऊं मैं किस ओर--कविता

 रसिक पिया तू ही बता,

 जाऊं मैं किस  ओर ।

 मैं इधर जाऊं या उधर जाऊं,

 मिला ना अब तक कोई छोर ।

 रसिक पिया तू ही बता,

 जाऊं मैं किस ओर। 

 रात रात भर जाग रहा,

 नींद न आई हो गई भोर।

 रसिक पिया तू ही बता

 जाऊं मैं किस ओर।

  दिल मेरा पतंग बन डोल रहा,

 मिली न कोई डोर।

 रसिक पिया तू ही बता,

 जाऊं मैं किस ओर। 

नाहक ही समझाया दिल को,

  दिल पर चले ना कोई जोर।

 रसिक पिया तू ही बता,

  जाऊं मैं किस ओर।

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