भागदौड़ वाली जिंदगी आखिर किसे सुहाती है,
लेकिन यही भागदौड़ तो जिंदगी बनाती है।
इंसान जब भी इस दुनिया में आता है,
बिना समझ के नासमझ ही रहता है।
उसे किसी से कोई मतलब नहीं रहता,
बस अपने में ही रमता रहता है।
कुछ बड़ा होने पर उसे लगता है,
दुनिया में आए हैं तो कुछ तो करना ही पड़ेगा।
कुछ पढ़ना पड़ेगा कुछ करना पड़ेगा,
यानी भागना दौड़ना तो करना ही पड़ेगा।
भागदौड़ से ही किसी की जिंदगी बनती है,
भागदौड़ ही सफलता की सीढ़ी बनती है।
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