शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2022

साथ निभाना मीत --कविता

 साथ  है अपना जनम जनम का ,

यह जनम यूं ही न जाए बीत।

संग संग जीना है हमको ,

 साथ निभाना मीत।


 सपने हमने संग संग देखे,

 एक दूजे से वादा करके।

 जग से हटके हमारी प्रीत, 

  साथ निभाना मीत।


 दिल से दिल की बात हुई,

 फिर शुरू मुलाकात हुई ।

 यही जगत की रीत,

 साथ निभाना में मीत। 


 जग चाहे दुश्मन हो जाए,

 पर अपने तो साथ निभाए।

 फिर होती प्यार की जीत,

  साथ निभाना मीत।

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