गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

इश्क में वादे तो हजार किए



 स्वरचित --

 सतीश गुप्ता 'पोरवाल'  


इश्क में वादे तो हजार किए ,

मेरे दिल के गुल गुलजार किए, 

पर मेरी चाहत नजरअंदाज करके,

 वादे  नीलाम सरे बाजार किए।


तुझसे मिलने को तरसता था मैं,

 जार जार इंतजार करता था मैं।

 ए बेवफा तुम्हारा सितम तो देखो, 

 वादाखिलाफी के दौर बार-बार किए। 


आसमा की ओर टकटकी लगाए रहता, 

 अब अक्सर नहीं होश में मैं  रहता।

 पर तूने मेरे दिन पतझड़ जैसे 

  और खुद के तो बहार किए ।


मेरी तो जो हालत होनी थी हो ली, 

 लगता हूं जैसे बिना कहार के हो डोली।

 तूने तो अपने दिन खुशगवार किए,

 मेरे ही दिन क्यों सूने त्यौहार किए।

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