शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2022

खाली दिमाग--कविता



स्वरचित-

सतीश गुप्ता'पोरवाल',मानसरोवर,जयपुर।


इधर उधर की बात न कर सुन ले मेरी बात,

 दिमाग तेरा तो उड़ गया ऊपरी माला खाली है।


 अब दिमाग लड़ा मत बात मेरी तो सुन ले,

  जो भी बात करेगा तू समझ ले वह जाली है।


   जिसको तू समझ रहा भरा भरा,

   वहां घास फूस की हरियाली है।


  सोच समझ कर बात पते की करता हूं 

  जो तू कहता है वह बस खयाली है।


 आज न कोई फायदा समझदारी दिखाने का,

   जो भी सही बात है वह कल वाली है। 


  जीवन के रंग बिरंगे फूल मैं ही सहेजूगा,  

  तुझसे ना होगा तू उजड़े बाग का माली है।

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