रविवार, 23 अक्टूबर 2022

आओ सजाएं दीपमाला प्रिये-कविता


 स्वरचित--

  सतीश गुप्ता 'पोरवाल' ,जयपुर। 


प्रफुल्लित हैं सब हर्षित समाया है सबके हिये, 

आ गया है आज पावन त्यौहार सबके लिये। 

 किसी का न अपना घर रहे सूना,

आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।


अमावस का चांद  कितना ही करना चाहे अंधियारा,

 पर जनमानस कर दे उतना ही उजियारा।

 चांद को अंगूठा दिखाएं हजारों दीये,

   आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।


  प्रेम के धागों से एक दूसरे से जुड़े रहें ,

  एक दूसरे की मुसीबत में साथ खड़े रहें। 

  हमेशा बने रहें हम एक दूजे के लिये, 

     आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।

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