स्वरचित--
सतीश गुप्ता 'पोरवाल' ,जयपुर।
प्रफुल्लित हैं सब हर्षित समाया है सबके हिये,
आ गया है आज पावन त्यौहार सबके लिये।
किसी का न अपना घर रहे सूना,
आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।
अमावस का चांद कितना ही करना चाहे अंधियारा,
पर जनमानस कर दे उतना ही उजियारा।
चांद को अंगूठा दिखाएं हजारों दीये,
आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।
प्रेम के धागों से एक दूसरे से जुड़े रहें ,
एक दूसरे की मुसीबत में साथ खड़े रहें।
हमेशा बने रहें हम एक दूजे के लिये,
आओ सजाएं दीपमाला प्रिये ।
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