सुन सुन दीदी तेरे लिए रिश्ता आया है,
छोटी बहिन कहते हुए चहक रही थी।
दीदी यह सुन खुश हो रही थी और
सच तो यह है कि थोड़ी सी महक रही थी।
अच्छा छुटकी बता कौन है कैसा है,
और उसके बैंक में कितना पैसा है।
छुटकी बोली पैसे का तो पता नहीं
लेकिन देखने में चांद के जैसा है।
दीदी ने मुंह बनाया और बोली
लड़की तो चांद जैसी होती है
लेकिन क्या लड़के की शक्ल भी ऐसी होती है।
छुटकी बोली दीदी वह कवि है और गंजा है,
दीदी बोली कवि है तो धंधा भी मंदा है।
कविता लिखने में रोज रात से भोर करेगा,
खुद गुनगुनायेगा और मुझे सुनाकर बोर करेगा।
जब मुझे गुस्सा आयेगा तो कैसे बाल खींचूगी,
सोचा था मिले हैंडसम बंदा पति मिल गया गंजा।
छुटकी बोली दीदी गंजा है तो क्या हुआ,
वह तो है खुले आसमान का चंदा।
यदि उसे तेरा भरपूर साथ मिल जायेगा ,
वह कवियों की दुनिया का सुरेन्द्र शर्मा बन जायेगा।
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