कपट भरा है मन में लाख करे चतुराई,
दुनिया सब जानत है सुन ले मेरे भाई।
सुन ले मेरे भाई भली नहीं ये चालें ,
यह बात अभी तक तुझे समझ न आई।
चाल चले तू टेढ़ी-टेढ़ी हम चले हैं सीधी,
हम दोनों के बीच रेखा तुमने ही खींची।
अब तो तू बदल ले अपनी आदत,
वरना हमारी मुट्ठी हो जाएगी भीची भीची।
सच्चे मन से काम करें जो सच्चा-सच्चा,
खुश हो जाए उससे घर का बच्चा-बच्चा।
इसे ही कहते हैं सच में चतुराई,
अब तो यह बात तुझे समझ में आई।
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