आज न जाने क्यों मन उदास है,
सभी दूर न कोई पास है ।
मिट जाएंगी कभी तो दूरियां,
मन में बस यही आस है।
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मेरे ही गुलशन में क्यों है पतझड़ जब सब में बहार आई है,
सबके खेत लहलहा रहे मेरे पर ही क्यों सूखे की लहर आई है।
देर न कर अब तो बता दे मेरे परमेश्वर,
सबके चेहरों पर है खुशी मेरे पर ही क्यों उदासी छाई है।
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प्रजातंत्र के इस मंदिर में हम अपना योगदान करेंगे ,
मत पेटी में गुप्त रूप से अपना मतदान करेंगे।
सरकार बनाने में चलेगी अब हमारी ही मर्जी,
नहीं चलेगी किसी हाल में नेताओं की मनमर्जी।
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ईश्वर में भरपूर निष्ठा है मेरी ,
पूजा अर्चना भी खूब करता हूं मैं।
इंसान जब भी गलत काम करे ,
तो भर्त्सना भी खूब करता हूं मैं।
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तू वीर है तो वीर बन,
धैर्य छोड़ अधीर बन।
सोच सोच में फर्क कर,
प्यादा नहीं वजीर बन।
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की सदा तो सदा मां कृपा चाहिए ,
यही कृपा हे मां हर दफा चाहिए ,
मेरा तो भविष्य ही मां ,
आपके द्वारा ही रचा चाहिए।
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कभी-कभी सामने वाले को,
जलाना पड़ता है ।
जलाकर उन्हें
राख बनाना पड़ता है।
राख बनेंगे तभी तो,
हल्के बनेंगे।
हल्के बनेंगे ,
तभी तो हमारे बनेंगे।
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जब सोच ही लिया तो ,
मन में द्वंद्व नहीं होता।
एक ठोकर खा जाने से,
इंसान चलना बंद नहीं करता।
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ये रंज-ओ-गम सभी मिलकर भी मुझ को न हरा पाते,
कितना भी कर लें सितम मुझको ना घबरा पाते।
रख लेते हम अपने दिल पर काबू ,
यदि वे एक नजर तो देख लेते जाते जाते।
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चमन में फूल बस यूं ही नहीं खिलते ,
कली को खिलने दोगे तभी तो फूल बनेगी।
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अमावस के अंधकार को लील लिया ,
सबके मन में हर्षोल्लास भर दिया ।
जब देखा जगमगाता हुआ ,
घर की देहरी पर जगमग दिया ।
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इबादतों में न दम , मुहब्बत तभी मुकम्मल नहीं हुई थी।
वह वह रही , मैं मैं रहा , शख्सियत हम नहीं हुई थी।
धड़क-धड़क धड़कता था दिल रुकती हुई थी सांसें,
वो मंजर देख-देख कर मन हो जाता था खिन्न।
कितनी भी कोशिश की मैंने उन्हें भुलाने की,
लेकिन यदा-कदा याद आ ही जाते हैं वे बेजार से दिन।
दिलों की दूरियां बहुत तड़पाती हैं रुलाती हैं,
टूटे हुए दिलों की कहानियां सुनाती हैं।
पर कुछ आत्माएं ऐसी भी हैं दुनियां में,
जो ग़मों के ही सही,नगमें गुनगुनाती हैं ।
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