शनिवार, 24 सितंबर 2022

वो अपना गुजरा हुआ जमाना (स्कूल के समय का)

 वो अपना गुजरा हुआ जमाना,

 आज भी याद आता है।

 स्कूल के दिनों की 

  याद दिला जाता है।


याद दिलाता है जब भी,

  मुझको बहुत सताता है।

मुझको बहुत सताता है ,

फिर भी मन को बहुत भाता है।


  कभी समय पर,

  स्कूल को रवाना नहीं होते थे।

 हाथ में बस्ता लेकर,

 खूब दौड़ लगाते थे।


  मास्टर जी तो जैसे,

तैयार ही बैठे रहते थे।

कुछ मिनटों की देर होने पर,

 दो चार डंडे बरसाते थे। 


 खाली समय पर कक्षा में,

 खूब शोर मचाते ।

 सीधे-साधे बच्चों को 

 ताता थैय्यां खूब नचाते।


 सुन कर बच्चों का शोर,

हेड मास्टर जी आते।

 आकर के दस-बीस,

 उठक-बैठक लगवाते।

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