#सतीश गुप्ता'पोरवाल'
ओय किधर को जाती तू
सुन ले ओ मेरी बजरबट्टू।
तू बुन्दी एक ग्राम की,
में सौ ग्राम का लड्डू ।
कल को होटल वाले ने,
खूब बनाया बुद्धू ।
ढाई ग्राम के अंगूर संग मिक्स किया,
सब्जी में ढाई किलो का कद्दू।
तुझे लग रहा होगा कि तू है गुड्डी,
और मैं तेरा गुड्डू ।
पर तू लग रही पोती सी,
और मैं लग रहा दद्दू ।
तू समझ रही है ,
मैं तुझ पर हूं लट्टू ।
हवा जरा आने दे ,
यहां से दूर हट तू ।
इधर-उधर क्यों घुमा रही,
समझा क्या भाड़े का टट्टू,
अच्छा बाबा तुम रसगुल्ला हो रस से भरा,
मैं बुन्दी का सूखा लड्डू।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें