शनिवार, 10 सितंबर 2022

तू रसगुल्ला, मैं सूखा लड्डू


 #सतीश गुप्ता'पोरवाल'


ओय किधर को जाती तू  

 सुन ले ओ मेरी बजरबट्टू।

  तू बुन्दी एक ग्राम की,

  में सौ ग्राम का लड्डू ।


  कल को होटल वाले ने,

  खूब बनाया बुद्धू ।

 ढाई ग्राम के अंगूर संग मिक्स किया, 

   सब्जी में ढाई किलो का कद्दू।


  तुझे लग रहा होगा कि तू है गुड्डी,

 और मैं तेरा गुड्डू ।

 पर तू लग रही पोती सी,

  और मैं लग रहा दद्दू । 


 तू समझ रही है ,

  मैं तुझ पर हूं लट्टू ।

  हवा जरा आने दे ,

 यहां से दूर हट तू ।

 

 इधर-उधर क्यों घुमा रही,

 समझा क्या भाड़े का टट्टू,

 अच्छा बाबा तुम रसगुल्ला हो रस से भरा,

   मैं बुन्दी का सूखा  लड्डू।

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