बुधवार, 21 सितंबर 2022

बस एक तेरी आरजू


दिल से दिल मिले थे,

 नसीब अच्छे लगे  थे।

तुम्हारे हमारे बीच 

 न शिकवा थे न गिले थे।

 लगता था हमारी बगिया में, 

 रंग बिरंगे फूल खिले थे। 

 न मिलती थी तुम,

तो हम रहते थे बेकरार।

 दिल हमारा तड़पता था,

 रोता था जार जार। 

 समय गुजरता ही नहीं था, 

 जब हम करते थे तुम्हारा इंतजार।

  हमारा यह बेकरार दिल ,

  तुम्हे ही देखना चाहता था बार-बार।

   एक झलक भी जब दिख जाती, 

   तो जैसे आ जाती थी बहार। 

 आंसुओं का भी पता नहीं,

 आंखों से बहे न बहे ।

 बस एक तेरी आरजू बरकरार रहे, 

 दिल का क्या है यह रहे न रहे।

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