फसा हुआ हूं सांसारिक भंवर में,
कोशिशें सब नाकाम होती जा रहीं,
रास्ता निकलने का नजर नही आता,
सागर तुम्ही दिखाओ मुझे कोई रास्ता ।
कभी पहाड़ की चोटी पर नजर आता हूं मैं,
कभी गहरी खाई में गिरता हुआ पाता हूं मैं,
क्या करूं क्या ना करूं समझ नहीं पाता,
सागर तुम्ही दिखाओ मुझे कोई रास्ता।
दुख मेरे सीने में हैं अथाह ,
और किससे मांगू मैं पनाह
मेरा दुख और कोई समझ नहीं पाता,
सागर तुम्ही दिखाओ मुझे कोई रास्ता।
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