रोज के नियम के हिसाब से ममता ने सुबह 6:00 बजे उठ कर , घर का झाड़ू- पोछा करने के बाद , चाय बनाई और महेश को आवाज दी- उठो चाय पी लो।महेश चाय पीता हुआ अखबार के पन्ने पलटता रहा,उधर ममता बच्चे के लिए नाश्ता बनाने में जुट गई, उसका स्कूल का समय जो हो रहा था। महेश इधर-उधर समय व्यतीत करता हुआ ममता को कहता है कि मेरा टिफिन जल्दी तैयार कर दिया करो ,ऑफिस में लेट हो जाता हूं, हालांकि ममता जानती थी कि वह उसकी वजह से लेट नहीं होता। बच्चे के स्कूल और महेश के ऑफिस जाने के बाद वह घर के अन्य कार्य में व्यस्त हो जाती। फिर बच्चे के स्कूल से आने के बाद कुछ समय के लिए बिस्तर पर सुस्ता लेती । शाम को महेश ऑफिस से आते ही तुरंत आवाज लगाता- अभी तक चाय तैयार नहीं हुई, तुम्हें मालूम था मैं ऑफिस से आने वाला हूं। ममता तुरंत चाय बनाती और दोनों चाय पी लेते। फिर ममता शाम के खाने की तैयारी करती ।यही क्रम रोजाना चलता रहता ।
एक दिन महेश को उसका मित्र नरेंद्र अपनी पत्नी के साथ बाजार में मिल गया , तो महेश बात करते हुए नरेंद्र की पत्नी के चेहरे को एकटक देखने लगा।नरेंद्र ने कहा-क्या बात है आज भाभी को पहली बार देखा है क्या? महेश ने कहा कि-अरे मैं देख रहा हूं कि भाभी के चेहरे पर कितना तेज है, मेरी पत्नी के चेहरे पर तो नहीं। नरेंद्र ने कहा कि इसका सीधा सा राज है- सिर्फ दो समय की चाय । मैं सुबह पत्नी से 15 मिनट पहले उठता हूं और चाय बना कर उसे आवाज देता हूं- चाय पी लो। शाम को ऑफिस से आने के बाद मैं ही चाय बनाता हूं।बेशक मैं थका हुआ रहता हूं पर वह भी तो थकी हुई रहती है।तुम भी यही फार्मूला क्यों नहीं अपपाते हो ?
अगले दिन महेश ने ऐसा ही किया। सुबह जल्दी उठकर चाय बना कर ममता ममता को आवाज दी-आओ चाय पी लो।ममता आश्चर्य से उठी और चाय पी ली ।
महेश ने उसके चेहरे की ओर देखा तो उसे लगा कि आज सूरज अपनी लालिमा लिए हुए,आसमान में नहीं उसके घर में ही उगा है।
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