वक्त भी इस वक्त इतना अहम हो गया है,
हर किसी को खुदा होने का वहम हो गया है।
जो था कल पाले दया अपने दिल में,
वह आज कितना बेरहम हो गया है।
वक्त था एक जब घेरे रहते थे मुझको,
तुम अपने हो यही कहते थे मुझको।
विपत्ति आखिर किस पर ही नहीं आती,
परिस्थितियां आकर किसको नहीं सताती।
जाना पहिचाना हर चेहरा अब,
अनजाना बन दूरियां जता रहा है।
वक्त ऐसे ऐसे दिन दिखा रहा है,
अपने पराए का भेद बता रहा है।
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