प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो,
मधुरता मिले तभी जब आवाज को साज दो।
आवारा सी लग रही है जिंदगी मेरी,
अब तुम ही आकर इसे पहिचान दो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो।
चाहता हूं जिन्दगी में बहुत कुछ करना,
आ जाओ तुम्ही इसे आगाज दो।
इंतजार तो कर लिया बहुत हमने,
अब अन्त कल नहीं बस आज हो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो।
दिल में छुपा कर रखे थे राज बहुत,
बताया तुम्हें ही तुम ही मेरे हमराज हो।
एक ही ढर्रे में चलना मुझे पसंद नहीं,
मेरे अंदाज को एक नया अंदाज दो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो।
तन्हा तन्हा कब तक चलता रहूंगा मैं,
जिंदगी के सफर में तुम ही मेरा साथ दो।
सांसें कैसे तन से जुड़ी हुई हैं,
तुम ही हां तुम ही इसका राज हो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो।
मैं तो अदना सा एक इंसान,
तुम ही इस इंसान की आवाज हो।
मेरी तमन्ना से तुम कैसे अनजान हो,
अब देर न कर मेरी आवाज को साज दो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो।
मैं पंख बनू तुम मेरी परवाज हो,
बात तो बने तभी तुम मेरी आवाज को साज दो।
प्रारब्ध पर मैं रुका हुआ तुम इसे अंजाम दो,
मधुरता मिले तभी जब मेरी आवाज को साज दो।
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